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जनवरी, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जिंदगी अपना एतिहास फिर नही दोहरायगी ...

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कुछ सालो बाद ये पल बहुत याद आयेगे, जब हम सब दोस्त अपनी अपनी मंजिल पर पहुंच जाएंगे, अकेले जब भी होगे साथ गुजरे हुए लम्हे याद आयेगे, पैसे तो बहुत होगे पर सायद खरच करने के लिए लम्हे कम पढ जाएगे, एक कप चाय याद दोस्तो  की दिलाएगी यही सोचते सोचते फिर से आंखे नम हो जायेगी , दिल खोलकर इन लम्हो को जी लो यारो  जिदंगी अपना एतिहास फिर नही दोहराएगी।...

यादो की एक झपकी ...

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जब भी तेरी याद आती आखे भर जाती,       पास अगर तो आ जाती शांशे थम जाती,         दूर अगर तू चली जाती धडकने रुक जाती,          जुल्फे अगर तो लहराती यादे फस जाती,             पास अगर तेरे मै आउ क्यो तू दूर चली जाती,      जब तू लंबे लंबे कदम बढाती दिल की खामोशी बढ जाती ,                                                अब कभी ना आना मेरी जिंदगी मै तू दोबारा मै घुट मर के जी लूँगा बेचारा....

गोद और कन्धे की तलाश...

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गोद और कन्धे से लगकर कितना शकुन मिलता है गोद मिले तो आंखे नम हो जाती है कन्धा मिले  तो दिल ख्यालो मे अटक जाता है मेरा भी तो गोद कन्धे का सहारा खो गया है आंखे बंद करता हू तो वो नजर आती है आंखे खोलता हो तो वो नजर आती है "क्या वजह थी" "क्या वजह थी" क्यों सिर्फ  मुझे ही मेरा नही प्यार नही मिला  इन सवालो  से रोज लढ़ता हू मैं दस्को से     सोया नही हू शकुन की एक झपकी लेने के लिए कोई गोद ढूंढता  हू कोई कन्धा ढूंढता हू लेकिन मैं उस तढ़फ को अपने अंदर शांत नहीं होने देता  मैं उस आग को बुझने नहीं देता मैंने उस दर्द को अपनी ताकत बनाया है खुद को इस काबिल बनाया है कि एक नजर में ही इंसान की रूह तक पढ़लू... यह बड़ा आसान है ये येसा है जैसे किसी मां का बच्चा खो गया हो और वह सदियों तक हर चेहरे से सवाल पूछती फिरे के  मेरे जिगर का टुकड़ा देखा है कहीं हर चेहरे को देखकर वह अंदाजा लगाती फिरे कि कहीं यही तो नहीं वो किसी भले इंसान ने उसे पाल लिया होगा बड़ा हो गया होगा शादी कर ली होगी मुझे याद करता होगा ऐसे जख्म कभी नहीं भरते क्या उस मां को नींद आती होगी...

परछाइयों सी होती है यादे।

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मेरे साथ अकसर रातों में ऐसा होता है, किसी सपने के वजह से आधी रात में नींद टूट जाती है, और मैं एकदम हड़बड़ा के उठ बैठता हूँ. नींद टूटने के बाद कुछ पल के लिए तो मुझे पता भी नहीं चल पाता कि मैं कहाँ हूँ, किस कमरे में हूँ, किसके घर में हूँ, किस शहर में हूँ? जब पूरे होश में आता हूँ तो समझ आता है कि मैं तपा मंडी के  कमरे में हूँ. ऐसा सिर्फ रातों में ही नहीं होता, दोपहर को भी जब कभी थका हुआ सो जाता हूँ और नींद खुलती है तो कुछ पल के लिए मैं पहचान ही नहीं पाता अपने इस कमरे को. मैं बड़े हैरानी से सामने की मेज, कुर्सी, टीवी, किताबों को देखता हूँ. सब चीज़ों को मैं इस तरह देखता हूँ जैसे इनसे मेरा कोई सम्बन्ध नहीं, कुछ पल के लिए लगता है मैं किसी अजनबी के कमरे में आ गया हूँ, ये सब...ये कमरा ये घर असली नहीं है, ये बस एक भ्रम है. असली तो मेरा घर है, मेरे शहर का मेरा वो घर. मन बड़ा बेचैन हो जाता है. बहुत से ख्याल आने लगते हैं, मेरा ये घर नहीं तो मैं यहाँ क्या कर रहा हूँ? क्यों अब तक रुका हुआ हूँ मैं इस शहर में और शहर के इस घर में, जो मुझे अजनबी सा लग रहा है? जो भी सोच कर आया था इस शहर, क्या मैंने वो...

अंगूर खाते हो।

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उस दिन मौसम बहुत दिलचस्प था हल्की  ठंडी ठंडी हवा चल रही थी और बारिश की भी शमशान बूंदे आसमान से टपक रही थी सच मै मौसम  बहुत शुहाना था उसको फोन किया तो बंद आ रहा था सोचा अकेला ही कही जाकर मौसम का आनंद लेना होगा बालकनी से  कमरे के अंदर दाखिल होते ही सीधा नजर घड़ी पर पढती है खैर काफी समय है  बाइक की चाबी उठाई और बाहर जाते टाइम एक बार फिर फोन ट्राई किया तब भी स्वीच आफ आ रहा था सोचा चलो खेल के मैदान मे जाया जाए बहा पहुंचा तो काफी लोग क्रिकेट और वालीबॉल खेल रहे है कूछ देर  मे उन बच्चो का खेल देखने के बाद बहा से चला जाता हू और बाइक पर बैठ कर पता नही क्या सोचने लगता हू धोड़ी देर बाद दिल कहता है कि फिर से फोन ट्राई करके देखो दूसरी तरफ दिमाग कह रहा है कोई फायदा नही लेकिन दुनिया बालो से  सुनते आ रहा था कि प्यार करो तो दिल से करो दोस्ती निभाओ तो दिल से और भगवान को पूजो तो दिल से और पता नही क्या क्या करो तो दिल तो मैंने सोचा क्यों ना दिल की ही बात मान ली जाए खैर फोन किया तो रिंग तो जा रही थी लेकिन फोन रिसीव नही हुआ फिर सोचा दिमाग की ही बात  मान लेता तो अच्छा था...

तंग जिदंगी से आत्महत्या ही मेरी सहेली हैं।

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कभी कभी जिंदगी मे मौत ही साथ देती है आत्महत्या सिर्फ नाकामयाबी की वजह नही होती बल्कि कई ऐसे कारन होते है किसी की अगर इज्जत मिट्टी मै मिल जाये तो आत्महत्या का शिकार दिखाई देता है कभी कभी लगता है कि सच मे अब मौत ही साथ देगी कई बार मां के साथ कहा सुनी या उसकी कोई बात मन को लग जाती है तो कई बार अपनी हाथ की नस काट कर जिदंगी को विदा करने की कोशिश करता हू लेकिन इतनी   हिम्मत जुटा पाना मुश्किल लगता है फिर कुछ देर बाद मन हल्का होता है तो मन कहता है कि तू बुजदिल है जो जीते जी मौत को गले लगा रहा है और मुझे एहसास भी हो जाता है कि मैं कितना गलत करने चला था कुछ लोग इस काम मैं कामयाब हो जाते होगे तो मुझे नही लगता कि उनकी आत्मा को शांति मिलती होगी उनकी आत्मा बस यहा बहा भटकती रह जाती  होगी. उसकी आत्मा को पछतावा होता होगा कि मुझे ऐसा नही करना चाहिए था उनकी आत्मा को शांति मिलती होगी या नही वो तो भगवान ही जाने लेकिन जिदंगी के खेल भी तो देखो पता नही किस किस मौढ़ से गुजरना पढ़ता है कि आत्महत्या को अपनी  सहेली बना कर उसके पास जाना ही पङता है।खैर अगर मै इस पोस्ट को लिख कर आपका दिल छोट...

तुम्हारा खोया हुआ चेहरा याद आता है..

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उस वक्त तुम बहुत खुबसूरत दिखती थी तुम्हारे बात करने का लहजा तुम्हारे पलके उठाने और झुकाने की अदा तुम्हारी चाल किसी सपनों की कहानी में दिखाए जाने वाली सोन परी जैसी थी तुम बड़ों की इज्जत करती थी बच्चों से प्यार करती थी. अजनबीयो का स्वागत करती थी. तुम्हारा शरमाना, नजरें चुराना, उदास होना, अस्क बहाना और मुसकुराह्ट को होंटो में दबाना किसी की भी हाथो से जान गिरा दे. मै बस तुम्हे समझाता ही रहता था कि लोगों के साथ ज्यादा चिपका मत करो लोग गलत मतलब निकाल लेते हैं तुम बड़ी भोली हो सबसे बातें मत किया करो कम बोला करो अजनबीयो को ऐसी बातें मत बताया करो लेकिन तुम मेरी एक नही सुनती थी. तुम जो भी करती थी चाहती थी कि में भी वैसा ही करू लेकिन मैं तुम्हारी ना दानियो मै नही पढने बाला था..... तुम मेरी तरह जिंदगी को छुप-छुपकर नहीं जीती थी  जब सड़क पर चलती थी तो हंसते खिलखिलाते हुए उची  आवाज में बातें करते हुए चलती थी. मुझे याद है तुम हर मंडे को शिव मंदिर जाती थी सफेद रंग की सलवार कमीज जिस्पर हरे और केसरी रंग की हाथों से की गई  कढाई के फूल बने होते थे. ना जाने क्यो तुम अपना दुपट्टा घर ...

तेरे मेरे प्यार की यादो मे बसा एक बुथ बगला

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दिसंबर का महीना चल रहा था याद है वो दिन तुम्हे जब हम एक सुहानी सी साम को एक बगले के पास मिले थे. जिसे बहा के लोग उस बगले को बूथ बगले के नाम से जाना करते थे.  बगले के बारे मे चर्चा थी के बहा एक लड़की ने जिदंगी से तंग आकर आत्महत्या की थी. उस बगले के पास हम बाते कर रहे थे. बातो बातो मे मैंने तुमसे पुछा था. कि तुम मुझसे कितना प्यार करती हो तुम्हारा जबाब बस यही होता था कि अपनी जान से भी ज्यादा तब मैंने तुम्हे मजाक मै कहा था कि इस बगले के अन्दर जाकर दिखायो तो जाने.  तुमने थोडा मुसकुरा कर मेरे सर पर हाथ रखकर मेरा सर सहलाने लगी थी. उस बगले के अंदर बहुत ही डरावना सा दिर्स. था अंदर जाने से मे भी डर रहा था. मैंने तुम्हे डराने के लिए एकदम कहा था कि बगले की छत पर कूछ अजीब सा है. तुम डर के उपर देखने लगी थी तब्ही अचानक मेंने किस किया था. इस बात पर  तुम थोडा नराज जरूर हुई थी. लेकिन बातो बातो मै मना लिया था. बगले के सामने एक छोटा सा बगीचा था थोङा खामोश होकर हम उस बगीचे की खूबसूरती देखने लगे. हाथो मे हाथ डालकर और एक दूसरे की आखो मै आखे डाल कर उस बगीचे की तरफ बङे बगीचे मै बहुत ही सुहानी...