तेरे मेरे प्यार की यादो मे बसा एक बुथ बगला
दिसंबर का महीना चल रहा था याद है वो दिन तुम्हे जब हम एक सुहानी सी साम को एक बगले के पास मिले थे. जिसे बहा के लोग उस बगले को बूथ बगले के नाम से जाना करते थे. बगले के बारे मे चर्चा थी के बहा एक लड़की ने जिदंगी से तंग आकर आत्महत्या की थी. उस बगले के पास हम बाते कर रहे थे. बातो बातो मे मैंने तुमसे पुछा था. कि तुम मुझसे कितना प्यार करती हो तुम्हारा जबाब बस यही होता था कि अपनी जान से भी ज्यादा तब मैंने तुम्हे मजाक मै कहा था कि इस बगले के अन्दर जाकर दिखायो तो जाने. तुमने थोडा मुसकुरा कर मेरे सर पर हाथ रखकर मेरा सर सहलाने लगी थी. उस बगले के अंदर बहुत ही डरावना सा दिर्स. था अंदर जाने से मे भी डर रहा था. मैंने तुम्हे डराने के लिए एकदम कहा था कि बगले की छत पर कूछ अजीब सा है. तुम डर के उपर देखने लगी थी तब्ही अचानक मेंने किस किया था. इस बात पर तुम थोडा नराज जरूर हुई थी. लेकिन बातो बातो मै मना लिया था. बगले के सामने एक छोटा सा बगीचा था थोङा खामोश होकर हम उस बगीचे की खूबसूरती देखने लगे. हाथो मे हाथ डालकर और एक दूसरे की आखो मै आखे डाल कर उस बगीचे की तरफ बङे बगीचे मै बहुत ही सुहानी और ठंडी ठंडी हवा चल रही थी. बहा पर लगी एक बेंच पर हम बैठ गए सामने लगे बेर के पेङ पर कुछ गिलहरी को बेर खाते तुमने देखकर कहा था कि कास मै भी गिलहरी होती और इसकी तरह तुम्हे दिखा दिखा कर बेर खा रही होती.
सामने से एक प्रेमी जोङा आ रहा है दोनो के जींस पहनी हुई है लङकी के वाईट कलर का टोप पहना है तुम्हारे सामने भी मै तुमसे नजरे चुरा कर उस लङकी की तरफ देख रहा था. लोग अक्सर साम को उस बंगले के पास आया जाया करते थे. हमै बाते करते करते अन्धेरा हो गया था मोबाइल मै टाइम देखा तो 6:48 हुए थे खैर बहा पर भीङ बढऩे लगी फिर बहा से कुछ दूरी पर काफी सांफ थी हम टहलते हुए बहा पहुंचे और काफी के कप पकङ लिए. मेरा कप तो खाली हो चुका था. एक तुम थी जो कप खाली करने का नाम ही नही ले रही थी. और मुझे चिढा चिढा कर धीरे धीरे पीने लगी मन तो कर रहा था कि कप छीन कर चेहरे पे मारो पर इतनी हिम्मत जुटा पाना मुश्किल था. तुम हो भी तो इतनी ताकत वर थी कि मुझे सबक सिखाना तुम्हारा वाये हाथ का खेल था. कही जाकर आधे घंटे मे कप खाली किया. काफी सोंप से बाहर निकलते ही घर जाने की हडबडी मचा दी. ओर एक किस देकर कहा गुड वाये "वायो" गुड वाये कहने का सटाय्ल कितना कुय्ट था तुम अक्सर कहा करती थी कि मै तो बचपन से ही सटाय्लीस और कुय्ट थी. तुम जा चुकी थी और मै बही बाइक के पास खढ़ा खढ़ा गहरी सोच मै. चला गया कुछ देर टठिलने के बाद मै भी बहा से चला गया....
सामने से एक प्रेमी जोङा आ रहा है दोनो के जींस पहनी हुई है लङकी के वाईट कलर का टोप पहना है तुम्हारे सामने भी मै तुमसे नजरे चुरा कर उस लङकी की तरफ देख रहा था. लोग अक्सर साम को उस बंगले के पास आया जाया करते थे. हमै बाते करते करते अन्धेरा हो गया था मोबाइल मै टाइम देखा तो 6:48 हुए थे खैर बहा पर भीङ बढऩे लगी फिर बहा से कुछ दूरी पर काफी सांफ थी हम टहलते हुए बहा पहुंचे और काफी के कप पकङ लिए. मेरा कप तो खाली हो चुका था. एक तुम थी जो कप खाली करने का नाम ही नही ले रही थी. और मुझे चिढा चिढा कर धीरे धीरे पीने लगी मन तो कर रहा था कि कप छीन कर चेहरे पे मारो पर इतनी हिम्मत जुटा पाना मुश्किल था. तुम हो भी तो इतनी ताकत वर थी कि मुझे सबक सिखाना तुम्हारा वाये हाथ का खेल था. कही जाकर आधे घंटे मे कप खाली किया. काफी सोंप से बाहर निकलते ही घर जाने की हडबडी मचा दी. ओर एक किस देकर कहा गुड वाये "वायो" गुड वाये कहने का सटाय्ल कितना कुय्ट था तुम अक्सर कहा करती थी कि मै तो बचपन से ही सटाय्लीस और कुय्ट थी. तुम जा चुकी थी और मै बही बाइक के पास खढ़ा खढ़ा गहरी सोच मै. चला गया कुछ देर टठिलने के बाद मै भी बहा से चला गया....

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