अंगूर खाते हो।
उस दिन मौसम बहुत दिलचस्प था हल्की ठंडी ठंडी हवा चल रही थी और बारिश की भी शमशान बूंदे आसमान से टपक रही थी सच मै मौसम बहुत शुहाना था उसको फोन किया तो बंद आ रहा था सोचा अकेला ही कही जाकर मौसम का आनंद लेना होगा बालकनी से कमरे के अंदर दाखिल होते ही सीधा नजर घड़ी पर पढती है खैर काफी समय है बाइक की चाबी उठाई और बाहर जाते टाइम एक बार फिर फोन ट्राई किया तब भी स्वीच आफ आ रहा था सोचा चलो खेल के मैदान मे जाया जाए बहा पहुंचा तो काफी लोग क्रिकेट और वालीबॉल खेल रहे है कूछ देर मे उन बच्चो का खेल देखने के बाद बहा से चला जाता हू और बाइक पर बैठ कर पता नही क्या सोचने लगता हू धोड़ी देर बाद दिल कहता है कि फिर से फोन ट्राई करके देखो दूसरी तरफ दिमाग कह रहा है कोई फायदा नही लेकिन दुनिया बालो से सुनते आ रहा था कि प्यार करो तो दिल से करो दोस्ती निभाओ तो दिल से और भगवान को पूजो तो दिल से और पता नही क्या क्या करो तो दिल तो मैंने सोचा क्यों ना दिल की ही बात मान ली जाए खैर फोन किया तो रिंग तो जा रही थी लेकिन फोन रिसीव नही हुआ फिर सोचा दिमाग की ही बात मान लेता तो अच्छा था सायद दिल का सिग्नल सिर्फ इतना ही था कि उसका फोन आॅन हो गया है और दिमाग यह कह रहा होगा कि फोन कर भी लो तो फोन रिसीव नही होगा फिर बाइक सटार्ट की ओर उसके घर जाना ही सही समझा जब उसके घर के पास पहुंचा तो घर के पास अपनी पढ़ोसन के साथ टहलती हुई अपने वालो को लहराते हुए उसके साथ बाते करती धीरे धीरे चल रही थी मै उसके पीछे बाइक पर सवार होकर देख रहा था एक पल के लिए मुझे एक शरारत सूझ रही थी तब तक उस की नजर मुझ पर पढ़ चुकी थी वो मुझे ऐसी पैनी नजरो से देख रही थी कि भगवान भी उसकी इन नजरो से डर जाए.....
इन पैनी नजरो का कारण भी मुझे पता था वो जो उसकी पडोसन थी उसके वारे मुझे बहुत कहानिया सूना चुकी थी कि वो बहुत चुगलखोर है और अगर उसको जरा भी भनक पढती की मै उसे से मिलने आया हू तो उसके जरिए सारे मुहल्ले को खबर हो जाती खैर थोडी देर बाद वो मेरे पास आई और आते ही दो चार सूना दी लगभग चिल्लाते हुए कहा कि मै तुम्हे कब से इशारे कर रही थी कि जाउ अभी यहा से मेरे पास अभी चुङेल खढी है और अगर इस को जरा भी भनक लग जाती तो दुनिया हमे गूगल पर खोजने लगती ओर पेपर मै खबर छपती की इस महीने सबसे ज्यादा बार खोजे जाने वाले प्रेमी ओर प्रेमिका ओर हम प्रेमी प्रेमिका है भी नही खैर उस टाइम चुप रहना ही बेहतर समझा और कहा बैठो बाइक पर कही घुमने चलते है थोडी दूर एक छोटा सा पार्क था तो वही जाना बैहतर समझा और पार्क मै घुसते ही नजर लटकते हुए अंगूर के गुच्छे पर पढी तो दिल से उसके लिए एक ही बात निकली
"अंगूर खाते हो"
"अंगूर खाते हो"

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