तुम्हारा खोया हुआ चेहरा याद आता है..

उस वक्त तुम बहुत खुबसूरत दिखती थी तुम्हारे बात करने का लहजा तुम्हारे पलके उठाने और झुकाने की अदा तुम्हारी चाल किसी सपनों की कहानी में दिखाए जाने वाली सोन परी जैसी थी तुम बड़ों की इज्जत करती थी बच्चों से प्यार करती थी. अजनबीयो का स्वागत करती थी. तुम्हारा शरमाना, नजरें चुराना, उदास होना, अस्क बहाना और मुसकुराह्ट को होंटो में दबाना किसी की भी हाथो से जान गिरा दे. मै बस तुम्हे समझाता ही रहता था कि लोगों के साथ ज्यादा चिपका मत करो लोग गलत मतलब निकाल लेते हैं तुम बड़ी भोली हो सबसे बातें मत किया करो कम बोला करो अजनबीयो को ऐसी बातें मत बताया करो लेकिन तुम मेरी एक नही सुनती थी. तुम जो भी करती थी चाहती थी कि में भी वैसा ही करू लेकिन मैं तुम्हारी ना दानियो मै नही पढने बाला था.....
तुम मेरी तरह जिंदगी को छुप-छुपकर नहीं जीती थी  जब सड़क पर चलती थी तो हंसते खिलखिलाते हुए उची  आवाज में बातें करते हुए चलती थी. मुझे याद है तुम हर मंडे को शिव मंदिर जाती थी सफेद रंग की सलवार कमीज जिस्पर हरे और केसरी रंग की हाथों से की गई  कढाई के फूल बने होते थे. ना जाने क्यो तुम अपना दुपट्टा घर पर ही भूल आती थी बाल गीले होते थे कमीज कि वाह नहीं होती थी गीले  बालों की वजह से कमीज गीली हुई होती थी  और उसकी गीली कमीज में से तुम्हारा गौरा   दूधिया जिस्म देखकर भगवान शिव में मेरी श्रद्धा और गहरी हो जाती थी. बचपन में मेरी मां ने मुझे जो परियों की कहानी सुनाई थी उस अफसाने पर अब यकीन सा होने लगता है वह लंबे लंबे कदम उठाती हुई भागी जा रही होती है सहेलियों को न्योता देती हुई बेवजह हंसती खिलखिलाती उड़ती हुई हाथों में पकड़ी पूजा की थाली में रखे फूलों और दूध के गिलास से छलकते टुकड़े और बूंदें पत्थर की सड़क पर भी उसके कदमों के निशान बनाते हुए जाते थे.  उसकी कलाई गहरे हरे रंग चूड़ियों के बोझ से कहीं टूट ना जाए यह फ़िक्र मुझे शाम तक चैंन से बठने नहीं देती अपने ख्वाबों खयालों में भी मुश्किल से बन सकने वाले चेहरे को देखने के लिए मैं भी हर संडे को अपने बेसमेंट में बने जिम में एक्सरसाइज करने की वजह छत पर चढ़कर डंड पेलता था जब गुजरती थी तो एक नजर मुझ गरीब पर भी डाल लेती थी. सिर्फ  बड़ी बड़ी मासूम आंखें और भोला सा चेहरा ही उसकी की इकलौती पहचान नहीं होता उसकी  बेचैनी से भरी चाल और मटकते कूल्हे भी तुमको जानलेवा बना रहे होते थे.....
जब तुम अपनी लंबी लंबी उंगलियों से अपने चेहरे पर गिरने वाली बालों की लटों को पकड़कर कान के पीछे रखती है तो ना जाने ऐसा क्यों लगता है कि इसके लिए मैं इश्वर से भी लड़ पडूंगा...गजले भी तो तुम जैसी खुबसूरत लङकियो पर लिखी जाती हैं अच्छे और बुरे शायर की पहचान भी यही से होती है कि क्या वो इनकी खूबसूरती को बयान कर पाता है अल्फाज नहीं मिलते जो इनके हुस्न को  कागज पर उतार सके. जो भी लिखो ऐसा लगता है तोहीन  लिख रहे है. मटक कर चलना बस यही जानती है. चेहरे को चांद और जुल्फों को बादल की तरह इस्तेमाल करना कोई तुम से सीखे. तुम्हारी वो मुस्कुराने की अदा. आंखों से बातें करना तुम्हारी वो ताकत थी जिसका तुम्हे  बिल्कुल भी पता नहीं था. तुम जहां भी जाती थी  छा जाती थी. तुम्हारे अंदर भीङ को अपनी तरफ खींचने का जन्मजात गुण होता था. जोश से भरी होती थी. खुदा आगे बढ़कर अपने लिए  मौके पैदा करती थी. लोगों की ना को हां में बदलना जानती थी....अब तुम्हारे अंदर ऐसा कुछ भी नही रहा पता नही तुम्हे किस की नजर लग गई.. भगवान से तुम्हारे उस खुबसूरत  चेहरे और व्यवहार  को  वापिस मांगता हू  कि भगवान चाहे तो मुझसे मेरी खुशी छीन ले लेकिन उसका चेहरा वापिस दे दे ।

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