सपने
सपने या तो अच्छे होते हैं या फिर बुरे पर मेरे सपने इन दायरों में नहीं आते मेरे सपने खौफनाक होते हैं मेरे सपने मुझे उन हादसों से रूबरू करवाते हैं जिनके पीछे दर्दनाक इतिहास होता है जैसे की ये घर मुझसे पहले इस घर में रहने वाली एक लड़की की गला घोंटकर हत्या की गई थी मुझे आज भी उस लड़की की चीखें सुनाई देती है रात दर रात उसकी मौत का आधा अधूरा मंजर मेरे सपने में और साफ होता जा रहा है अब तो जागते हुए भी ऐसा लगता है जैसे कोई आस पास है पर मैं बस यही उम्मीद करता हूं कि बुरे सपनों का यह दौर बस यहीं तक सीमित रहें कही मेरे सपने हकीकत बनकर मेरे सामने ना आ जाए बस अब ये घुटन और सही नहीं जाती इस से पहले की मेरे लिए हालात और बिगडे मेने ये घर छोड देने का फैसला किया है इनसान अपने दुश्मनों से भाग सकता है पर भला कोई अपने ख्वाबों से दूर कैसे भागे मेरे दोस्तों को लगता है कि यह महेश मेरा वहम है पर यह सच नहीं है मैं शायद इस मामले में कभी किसी को यकीन दिला पाउ पर उन्होंने मुझे इस बात का यकीन दिला दिया है कि "आई एम डिप्रेस" में उम्मीद करता हूं कि यह सपने मेरा पीछा करना छोड़ देंगे में एक नई जिंदगी की शुरुआत एक नई जगह पर करो जहां की हवाओं में पहले की तरह किसी बुरे हादसे की गंद ना हो जहां में खुलकर सांस ले सकूं बगैर किसी खौफ के । लगता है खौफ का साया अब भी मेरे साथ है यहां आने से पहले उस जगह की जो तस्वीरें मैंने अपने मन में देखी थी वो सब वैसे ही यहा हूबहू मौजूद हैं पर कुछ पहलू ऐसे हैं जो अब भी मेरी समझ के बाहर है जैसे कि मेरे कंधे पर खून की बूंदों का गिरना मेरे रूम में एक डरावनी शक्ल की लड़की का झूले पर बैठे रहना क्या इन्हे भी मैं अपने वहम का दर्जा देकर भूल जाओ "और" और "माया" माया तो जिन्दा है फिर कल रात जो मैंने उसके बारे में देखा उसका क्या मतलब हो सकता है जाने क्यों मुझे ऐसा लग रहा है कि हम सब पर कोई बड़ी मुसीबत आने वाली हैं और मैं एक नई शुरुआत की राह में हूं इस उम्मीद में कि खौफ का साया मेरी परछाई ना बन जाए और अगर इस खौफ के साथ एक उमर भर का रिश्ता लिखा ही है तो मैं उसके साथ जीने की आदत डाल सकूं।...
