कुछ बातें जो कहनी है तुमसे....
ना जाने यह मेरा अतीत है या और कुछ... पर ना जाने मुझे मेरी डायरी का पन्ना इतना बेचैन सा क्यों लग रहा है.... हर शाम हवा के धीमे से थपेड़े से भी परेशान होकर फडफडाने लगता है... आज उस पन्ने को खोलते हुए एक सुकून सा लग रहा है... *******************