Tumhari yadon mein dobbi ek subah.... happy birthday
सुबह उठा तो देखा सुबह के 4 बजने वाले हैं, बाहर हल्की हल्की बारिश हो रही है, ठंडी हवा के झोंके खिड़की के परदे के साथ ठिठोली कर रहे हैं, और बीच बीच में रह रह कर चौकदार के डंडे की आवाज़ ... क्या खूबसूरत शायराना मौसम है, लेकिन इस संगीत के बैकस्टेज में नींद आखों से कोसों दूरहै, शायद इस नींद को भी पता चल गया है कि आज तुम्हारा जन्मदिन है | तुम्हें इसकी मुबारकबाद न दे पाने की टीस ही है जो नींद को परे हटा रही है | धत, ये तुम्हारा जन्मदिन भी न, न जाने कितनी जल्दी चला आया है... और पागल अब भी यही समझता हूँ कि तुम्हें मेरे फोन का इंतज़ार रहता होगा, लेकिन तुम कोई पारो थोड़े न हो जो अपने देवा की याद में दिया जलाये बैठे होगी... लोग अक्सर ये कहते हैं कि ये देवदास बनने का ज़माना नहीं रहा, हुंह वोपगलेक्याजानेकोई शौक से थोड़े न किसी की याद में गुम रहता है....इसपर खुद का कोई जोर ही नहीं.... उन्हें क्या पता किसी को आवाज़ लगाते समय कितना ध्यान रखना पड़ता है कि कहीं तुम्हारा नाम न निकल जाए, आज कल किसी की शक्ल याद रखने में कितनी परेशानी होती है, कमबख्त ऐसा लगता है जैसे रेटिना पर क...